बौद्ध आरक्षण विरोधाभास उस संवैधानिक और वैचारिक टकराव को उजागर करता है जहाँ २२ प्रतिज्ञाओं के माध्यम से हिंदू धर्म का औपचारिक त्याग करने वाले व्यक्ति अनुसूचित जाति आरक्षण के लाभ प्राप्त करते रहते हैं। यह लेख वर्ण, जाति, औपनिवेशिक नीतियों और अनुच्छेद ३४१ की पृष्ठभूमि में इस संस्थागत विरोधाभास का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
