यह लेख 2025 के ट्रम्प के ग़ाज़ा प्रस्तावों के माध्यम से उस ऐतिहासिक सत्य को उजागर करता है जिसे अरब राष्ट्र दशकों से जानते थे। फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों का प्रश्न केवल मानवीय नहीं, बल्कि संगठनात्मक और अस्तित्वगत है। मिस्र, जॉर्डन, लेबनान और कुवैत के अनुभव दिखाते हैं कि स्थायी पुनर्वास नहीं, बल्कि स्थायी शरणार्थी स्थिति ही रणनीति का केंद्र है।
