यह लेख फिलिस्तीन को एक वैश्विक प्रयोगशाला के रूप में प्रस्तुत करता है, जहाँ सभ्यतागत युद्ध की रणनीतियाँ पहले परखी जाती हैं और फिर कोसोवो, कश्मीर तथा अन्य क्षेत्रों में लागू की जाती हैं। पाँच-चरणीय पैटर्न, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका, मीडिया समन्वय और सितंबर 2025 की मान्यता लहर इस विश्लेषण का केंद्र हैं।
