यह लेख नेतन्याहू के संयुक्त राष्ट्र महासभा भाषण का विश्लेषण करता है, जिसमें उन्होंने मध्ययुगीन रक्त-अपवादों और आधुनिक जनसंहार आरोपों के बीच ऐतिहासिक निरंतरता को रेखांकित किया। लेख तर्क देता है कि यहूदी-विरोधी प्रतिरूप केवल रूप बदलते हैं, और समकालीन वैश्विक राजनीति में उनके परिणाम हिंसक और दूरगामी होते हैं।
